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Politics National

Posted by admin on 2023-08-04 12:48:08 |

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_खुशराज वैष्णव_

शाहपुरा की जनता को आजादी के बाद से ही लगातार अलग-अलग मजेदार लॉलीपॉप मिलते रहे हैं जो यहां के राजनेताओं की सुस्ती को स्पष्ट इंगित करते हैं। 

लोग बताते हैं के एक समय शाहपुरा भीलवाड़ा से काफी आगे था और आज जो विकास का उपहार भीलवाड़ा को मिल रहा हैं वह पहले शाहपुरा के श्री चरणों में धरा गया था किंतु यहां के राजनेताओं ने उसे ठुकरा दिया जिससे शाहपुरा पिछड़ा रह गया।

फिर समय बदला जनता जागी और शाहपुरा के लिए विकास के लिए रेल की मांग की किंतु कहते हैं के शाहपुरा के राजनेताओं को केवल और केवल गांव तक ही राजनीति आती हैं शायद यही कारण है के वे ना कभी शाहपुरा अस्पताल को सुविधाएं दे पाएं और ना कभी रेल का मुंह शाहपुरा की ओर मोड़ पाये । हर बार सरकार शाहपुरा को लॉलीपॉप देती आई हैं मगर इस बार दोनों पार्टियों ने मिलकर शाहपुरा की जनता को जिले के नाम पर ऐसी रबड़ की मीठी गोली दी हैं जो दिखने में ही मीठी और खुबसूरत है क्योंकि इसकी सारी मिठास भीलवाड़ा के खाते में धर दी गई है इसे बस चबाते रहो। भीलवाड़ा और शाहपुरा की सीमाएं तय करते समय राजनेताओं ने बड़ी ही चालाकी से आय के बड़े स्त्रोत जिंदल मांइस और रामपुरा आंगूचा माइंस को भीलवाड़ा की झोली में डाल दिया। देखा जाए तो रामपुरा माइंस (आंगूचा) शाहपुरा से महज 43 किलोमीटर है जबकि भीलवाड़ा से 71 किलोमीटर है फिर भी इसे बड़ी ही चालाकी से भीलवाड़ा जिले में ले लिया गया । यह सीमा निर्धारण का खेल भीलवाड़ा के नेताओं की चालकी और शाहपुरा के नेताओं के निकम्मेपन को दर्शाता हैं ।

इस सीमांकन को देखकर लोग समझ सकते हैं की बड़े और बाहरी राजनेता शाहपुरा के साथ कैसा सौतेलापन दिखा रहे हैं।

*वैसे मेरी बातें कड़वी हो सकती है मगर लॉलीपॉप बहुत मीठा हैं, चुसते रहो।*

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