Posted by admin on 2023-06-28 03:59:10 | Last Updated by admin on 2026-02-23 21:26:04
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खत लिखता हूं खून से स्याही मत समझना...
खुशराज वैष्णव
खत लिखता हूं खून से स्याही मत समझना.. ऐसी शायरी आपने भी पढ़ी होगी लेकिन आज एक खबर पढ़िए एक ऑनलाइन पॉर्टल पर एक ख़बर प्रकाशित हुई है के एक युवा ने अपने चहेते खिलाड़ी को ख़ून से लिखकर आमंत्रण-पत्र भेजा हैं । कितनी अच्छी बात है के अपने क्षेत्र का एक युवा अपने पसंदीदा खिलाड़ी को आमंत्रित करने के लिए खुन से खत लिख रहा हैं? सोचिए कितना दर्द हुआ होगा उस युवा को ? लेकिन क्या ऐसा करना उचित है?
लोग खुन से खत लिख रहे हैं और बुद्धिजीवी ऐसे लोगों की महिमा मंडन करते हुए खबरें प्रकाशित कर रहे हैं क्या यह सही है?
किसी खिलाड़ी का प्रशंसक होना गलत बात नहीं है मगर इसके लिए खुन से खत लिखना कभी भी उचित नहीं है। हां , अगर इसके बजाय रक्तदान होता तो कुछ अलग बात होती । क्योंकि अगर ऐसे कारनामों को ख़बरों के माध्यम से इस प्रकार परोसा जाता रहा तो अनेक युवा ऐसा करने लग जायेंगे और हो सकता हैं कल कोई अपने आपको बड़ा प्रशंसक साबित करने के चक्कर में पत्थर से अपना सिर फोड़ लेगा या कोई अपनी नसें काट लेंगा । इसलिए मुझे लगता हैं की ऐसी खबरों को सोच-समझकर प्रकाशित व प्रसारित किया जाना चाहिए ।
पत्रकारों को समझना चाहिए के खबरें न केवल जानकारी उपलब्ध करवाती हैं बल्कि ये लोगों को अच्छा या बुरा करने के लिए प्रेरित भी कर सकती हैं । अतः मेरा मानना हैं की ख़बर के प्रभाव को समझकर ही ख़बर प्रकाशित होनी चाहिए।